4 महीने में 4 बार ट्रंप ने कि‍या चैलेंज, अब भारत ने दी हि‍साब बराबर करने की चेतावनी

जब से डोनाल्‍ड ट्रंप अमेरि‍का के राष्‍ट्रपति बने हैं तब से व्‍यापार के मोर्चे पर कई बार भारत और अमेरि‍का आमने-सामने आए हैं। इनमें दवाएं, दालें, गेहूं-चावल, हार्ले डेवि‍डसन और स्‍टील व एल्‍यूमीनि‍यम तक शामि‍ल हैं। इन सबसे पीछे की वजह है भारत के साथ अमेरि‍का का व्‍यापार घाटा जो 2017 में 22.9 अरब डॉलर था। ट्रंप इसे कम करना चाहते हैं।
नई दिल्‍ली। जब से डोनाल्‍ड ट्रंप अमेरि‍का के राष्‍ट्रपति बने हैं तब से व्‍यापार के मोर्चे पर कई बार भारत और अमेरि‍का आमने-सामने आए हैं। इनमें दवाएं, दालें, गेहूं-चावल, हार्ले डेवि‍डसन और स्‍टील व एल्‍यूमीनि‍यम तक शामि‍ल हैं। इन सबसे पीछे की वजह है भारत के साथ अमेरि‍का का व्‍यापार घाटा जो 2017 में 22.9 अरब डॉलर था। ट्रंप इसे कम करना चाहते हैं। हालांकि अमेरि‍का की सख्‍ती की वजह से भारतीय कारोबारि‍यों को होने वाले नुकसान के मद्देनजर अब भारत ने भी सख्‍त संदेश दि‍या है। भारत का कहना है कि‍ अमेरिकी नीति‍यों की वजह से भारत को जि‍तना नुकसान होगा, उतना ही नुकसान अमेरि‍का को भी उठाना पड़ेगा। क्‍या है ताजा मामला भारत ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरि‍का अपनी संरक्षणवादी नीति‍यों पर लगाम नहीं लगाएगा तो वह 20 अमेरिकी उत्‍पादों पर 100 फीसदी तक ड्यूटी लगाएगा। इनमें सेब, बादाम और आयात होने वाली मोटरसाइकिलें और अन्‍य उत्‍पाद शामिल हैं। भारत ने यह जानकारी वि‍श्‍व व्‍यापार संगठन (WTO) को दी है। इन 20 वस्तुओं में ताजे सेब, मटर, अखरोट, सोयाबीन तेल, परिष्कृत पामोलिन, कोको पाउडर, चॉकलेट उत्पाद, गोल्फ कार, 800 सीसी से अधिक इंजन क्षमता के साथ मोटर साइकिल और अन्य वाहन शामिल हैं। कैसे होगा हि‍साब बराबर अमेरिका ने 9 मार्च को भारत सहि‍त अन्‍य देशों से आयत होने वाले स्‍टील पर 25 फीसदी और एल्‍यूमीनियम पर 10 फीसदी अतिरिक्‍त ड्यूटी लगाई थी। इस ड्यूटी हाईक से केवल कनाडा और मैक्सिको को छूट दी गई थी। यह ड्यूटी हाईक 21 जून 2018 से लागू होनी है। भारत ने कहा है कि अमेरिका ने यह कदम बिना चर्चा के उठाया है। भारत ऐसे में अमेरिका को दी जा रही रियायत को खत्‍म कर सकता है। यह उतना ही किया जा सकता है जितना अमेरिकी कदम से भारत को नुकसान होगा। भारत ने कहा है कि स्‍टील पर अमेरिकी ड्यूटी बढ़ाने से भारत को करीब 134.4 मिलियन डॉलर और एल्‍यूमीनियम पर ड्यूटी बढ़ाने से करीब 31.16 मिलियन डॉलर का प्रभाव पड़ेगा। इससे पहले 1 ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का वि‍रोध (फरवरी) - मोदी सरकार ने बजट 2018-19 में मेक इन इंडि‍या को बढ़ावा देने के लि‍ए ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ा दी थी। सरकार ने बजट 2018 में कम्‍पलि‍टली नॉक डाउन (CKD) और कम्‍पलि‍टली बि‍ल्‍ड यूनि‍ट (CBU) की इंपोर्ट ड्यूटी को 5 फीसदी बढ़ा दि‍या है। इस फैसले पर अमेरि‍का ने कड़ा एतराज कि‍या। ट्रम्‍प ने भारत को भी धमकी दी थी कि अमेरिका भी अपने यहां इम्‍पोर्ट होने वाली भारतीय मोटरसाइकिलों पर इम्‍पोर्ट ड्यूटी बढ़ा देगा। 2 एक्‍सपोर्ट प्रोग्राम पर ऐतराज (मार्च) - अमेरि‍का भारत के पूरे एक्‍सपोर्ट प्रोग्राम पर ही उंगली उठा चुका है। उसका आरोप है कि भारत गैर वाजि‍ब तरीकों से अपने कारोबारि‍यों की मदद कर रहा है और इससे अमेरीकी मजदूरों को नुकसान हो रहा है। अमेरि‍का ने वर्ल्‍ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) में इसकी शि‍कायत की है। अमेरि‍का के व्‍यापार प्रति‍नि‍धि रॉबर्ट लाइटजर ने कहा कि एक्‍सपोर्ट सब्‍सि‍डी प्रोग्राम की वजह से अमेरि‍की कामगारों को नुकसान उठाना पड़ता है। इसकी वजह से उन्‍हें एक ऐसा मैदान मि‍लता है, जहां किसी और का पलडा पहले ही भारी होता है। भारत इन योजनाओं के तहत 7 अरब डॉलर की सब्‍सि‍डी देता है। 3 दालों पर इंपोर्ट ड्यूटी का वि‍रोध (अप्रैल) - दालों के इंपोर्ट पर ड्यूटी बढ़ाने के फैसले का भी अमेरि‍का भारी वि‍रोध कर चुका है। अमेरि‍का ही नहीं दालों पर इंपोर्ट ड्यूटी ब़ढ़ाने के भारत के फैसले का कनाड़ा, ऑस्‍ट्रेलि‍या, यूक्रेन और यूरोपीय यूनि‍यन भी वि‍रोध कर चुके हैं। इसकी शि‍कायत भी डब्‍लूटीओ में की गई जहां भारत ने ये कहकर बचाव कि‍या है कि देश में दालों के बंपर प्रोडक्‍शन की वजह से सप्‍लाई और डि‍मांड के संतुलन को बनाए रखने के लि‍ए यह फैसला लि‍या गया। 4 गेहूं-चावल पर सब्‍सि‍डी का वि‍रोध (मई) - अमेरिका ने आरोप लगाया है कि भारत ने गेहूं और चावल की सरकारी खरीद में सब्सिडी घटाकर दिखाई है। इस मसले को लेकर उसने भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत की है। आपको बता दें कि किसानों की फसल की उचित कीमत दिलाने के लिए सरकार हर साल गेहूं और चावल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करती है और इसी दर पर किसानों से गेहूं-चावल खरीदती है। अमेरिकी अधिकारियों को इसी MSP पर आपत्ति है। उनका दावा है कि एमएसपी के रूप में भारत सरकार जितनी सब्सिडी की घोषणा करती है, असल में उससे ज्‍यादा देती है।
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